सवालों के घेरे में रहा भारत का सबसे चर्चित रणथंभौर टाइगर रिजर्व

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कभी चहां गिने चुने बाघ हुआ करते थे, जो संख्या आज काफी अधिक हो गई है। लेकिन इस साल रणथंभौर मानव-वन्यजीव संघर्ष, मौतों, सुरक्षा चूक और टूरिज्म सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार को लेकर भी सवालों के घेरे में रहा। नया साल आने से पहले सवाल ये है कि क्या रणथंभौर सुरक्षित दिशा में जा रहा है या खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। पहला बड़ा सवाल जीन पूल संकट। जंगल के भीतर छिपी बड़ी चिंता।

रणथंभौर में बाघ बढ़े तो टकराव भी बढ़ा। इस बीच बाघों की संख्या और मूवमेंट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नए शावक, युवा बाघ और बढ़ती टेरिटरी की लड़ाई ने रणथंभौर के जंगल को जीवंत रखा, लेकिन इसका असर पड़ा जंगल की सीमाओं के बाहर। इस साल बाघ के हमलों में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, तो एक मौत पैंथर ने भी ले ली। जबकि कई अन्य ग्रामीण और स्थानीय लोग जंगली जानवरों के हमले में गंभीर घायल हो गए। जिसमें रणथंभोर के गणेश मार्ग पर 7 साल के मासूम बच्चे की मौत, ड्यूटी पर तैनात फर्स्ट ग्रेड रेंजर की मौत, त्रिनेत्र गणेश मंदिर क्षेत्र में जैन मंदिर के बुजुर्ग चौकीदार की बाघ के हमले में मौत की घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया।

रणथंभौर सिर्फ जंगल नहीं, आस्था का केंद्र भी
जहां स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर आस्था बनाम सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा कर रहा है। 2025 में त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग को कई बार बंद करना पड़ा। क्योंकि गणेश मार्ग और रणथंभौर फोर्ट पर बाघों और उनके शावकों का लगातार मूवमेंट दर्ज किया गया। कई बार शेरपुर धाम का प्रवेश द्वार बंद कर श्रद्धालुओं को रोका गया तो कई बार दर्शन तक स्थगित कर दिए गए और पुलिस के साथ वन विभाग को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी। ये पहला मौका नहीं था। लेकिन संकेत साफ हैं कि जंगल और इंसान के रास्ते टकरा रहे हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष के बीच बढ़ रहा है खतरा। रणथंभौर के आसपास बसे गांवों में साफ दिखता है। खेती के इलाके और धार्मिक मार्ग अब सब संवेदनशील जोन बन चुके हैं। सिर्फ बाघ ही नहीं, 2025 में पैंथर, भालू और अन्य वन्यजीवों के हमलों में भी मौत और घायल होने के मामले सामने आए। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जंगल पर बढ़ता दबाव, शोर, भीड़ और अनियंत्रित गतिविधियां वन्यजीवों के व्यवहार को आक्रामक बना रही हैं ।

रणथंभौर में वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव और अनियंत्रित गतिविधियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई और मानव वन्यजीव संघर्ष को लेकर सख्त निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम फैसले में साफ कहा कि अगर मानव वन्यजीव संघर्ष में किसी की मौत होती है तो पीड़ित परिवार को 10 लाख तक मुआवजा दिया जाए। साथ ही टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अनियंत्रित सफारी, अवैध पर्यटन गतिविधियों और सुरक्षा से खिलवाड़ पर सख्त रोक लगाने के सुप्रीम आदेश दिए गए। संदेश साफ कि पर्यटन कमाई का साधन हो सकता है, लेकिन जान से ऊपर नहीं ।

2025 में रणथंभौर ट्यूरिज्म ने रिकॉर्ड पर्यटक
इन सब घटनाओं के बीच 2025 में रणथंभौर ट्यूरिज्म ने रिकॉर्ड पर्यटक संख्या और करोड़ों रुपये का राजस्व भी कमाया। लेकिन इस बीच स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों की ओर से फर्जी सफारी और भ्रष्टाचार के कई बार आरोप लगाए गए। आरोपों के बीच प्रदर्शन भी हुई, आरोपों में फर्जी पहचान पर सफारी बुकिंग, तय कोटे से ज्यादा वाहनों की एंट्री, दलालों के जरिए ब्लैक में टिकट, नियमों को ताक पर रखकर वीआईपी सफारी, गाइड और वाहन आवंटन में पक्षपात जैसे अहम आरोप आज भी जांच में फंसे हैं। इन सबके बीच ईमानदार पर्यटक नियमों में फंसा रहा और सिस्टम से जुड़े लोग जंगल में पिछले रास्ते से घुसते रहे ।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अवैध और अतिरिक्त सफारी बाघों के प्राकृतिक व्यवहार को बिगाड़ती हैं। जंगल में शोर, वाहनों की भीड़ और इंसानी दबाव के कारण बाघ अपने पारंपरिक इलाके छोड़कर मंदिर मार्ग, गांवों और सड़कों तक आ जाते हैं। मुख्य रुप से ये ही कारण है कि आज मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सभी घटनाओं को देखकर सिर्फ यहीं कहा जा सकता है कि साल 2025 सिर्फ उपलब्धियों भरा नहीं। चेतावनी भरा साल था चेतावनी सिस्टम की कमजोरियों की, पर्यटन लालच का और संरक्षण बनाम कमाई की लड़ाई का इसका असर ये हुआ कि बाघों की संख्या तो बढ़ी लेकिन इंसानों की मौत भी हुई, श्रद्धा बढ़ी लेकिन रास्ते भी बंद हुए, राजस्व बढ़ा, लेकिन भ्रष्टाचार के दाग भी गहरे हुए । अब गुजरे साल से सबक लेकर 2026 में क्या होगा बदलाव। लेकिन जरुरत है फर्जी सफारी पर कठोर कार्रवाई की। टूरिज्म सिस्टम की निष्पक्ष जांच की, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का ईमानदारी से पालन करने की, त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग और गांवों में स्थायी सुरक्षा योजना की और सबसे अहम। रणथंभौर के बाघों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की ।

बाघों के संरक्षण की परीक्षा है रणथंभौर
रणथंभौर सिर्फ एक टाइगर रिजर्व नहीं भारत के बाघों के संरक्षण की परीक्षा है। अगर यहां बाघ, इंसान और आस्था तीनों सुरक्षित रह सके तभी कहा जाएगा कि रणथंभौर सच में संरक्षित है ।


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