बाड़मेर। हरसाणी उप-तहसील क्षेत्र में पेयजल संकट अब सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार और जनविरोधी कार्यशैली के खिलाफ जनआक्रोश का प्रतीक बन चुका है।
महीनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे ग्रामीण लगातार अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, आवेदन देते रहे, शिकायतें दर्ज करवाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिले, समाधान नहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन (JJM) के तहत काग़ज़ों में तो करोड़ों रुपये के कार्य पूरे दिखा दिए गए, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि नल सूखे हैं, टंकियां शोपीस बनी हुई हैं और घर-घर पानी पहुंचाने का सपना छलावा साबित हो रहा है। मजबूर होकर ग्रामीण पिछले दो दिनों से धरने पर बैठे थे, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने उनकी आवाज़ सुनना जरूरी नहीं समझा।
जब हद से ज़्यादा सब्र टूट गया, तो 7 जनवरी को हरसाणी उप-तहसील क्षेत्र के सभी गांवों में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया। यह बंद सिर्फ बाजारों का नहीं था, बल्कि सिस्टम के खिलाफ जनता के धैर्य टूटने का ऐलान था।
इसी बीच जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी को मिली, तो उन्होंने किसी देरी के बिना सीधा मोर्चा संभाल लिया। क्षेत्र लौटते ही विधायक भाटी सीधे मुख्य अतिरिक्त अभियंता, पीएचईडी (PHED), बाड़मेर के कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से दो टूक सवाल किए।
विधायक भाटी ने कहा कि वे पिछले एक वर्ष से लगातार विभाग के साथ पत्राचार कर रहे हैं, बार-बार चेतावनी दे चुके हैं, विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा चुके हैं, इसके बावजूद विभाग ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी हैं। उन्होंने अधिकारियों से साफ शब्दों में पूछा कि आखिर उनके क्षेत्र की जनता को पानी कब मिलेगा और इस पूरे घोटाले की जिम्मेदारी कौन लेगा।
जब अधिकारियों की ओर से टालमटोल भरे जवाब और कोई ठोस समय-सीमा नहीं मिली, तो विधायक भाटी ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे प्रशासन को हिला कर रख दिया। उन्होंने अधिकारी के कार्यालय में ही उसके सामने ज़मीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया और ऐलान किया कि जब तक कार्रवाई नहीं होगी और जनता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे यहीं से नहीं उठेंगे।
विधायक का यह आक्रामक रुख देखते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते हरसाणी उप-तहसील क्षेत्र एवं अन्य क्षेत्र के सभी गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण बाड़मेर स्थित एईएन कार्यालय पहुंच गए और अपने विधायक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए। पूरा कार्यालय परिसर जनता के आक्रोश और नारों से गूंज उठा।
कई घंटों तक चली तीखी और निर्णायक वार्ता के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि स्थिति गंभीर है और समाधान के लिए उन्हें 10 दिनों की स्पष्ट मोहलत चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीणों की अन्य लंबित मांगों को भी मानने पर विभाग ने सहमति जताई।
मीडिया से बातचीत में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने बेहद आक्रामक अंदाज़ में कहा कि जल जीवन मिशन में लंबे समय से खुलेआम घोटाले चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह अधिकारियों और बिचौलियों की भ्रष्ट व्यवस्था की बलि चढ़ चुका है। भाटी ने आरोप लगाया कि जिन योजनाओं से ग्रामीणों का जीवन बदलना था, वही योजनाएं आज जनता के लिए अभिशाप बन गई हैं।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर वादे के अनुसार हर घर तक पानी नहीं पहुंचा, तो वे न सिर्फ दोबारा धरने पर बैठेंगे, बल्कि आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। भाटी ने कहा, “यह लड़ाई राजनीति की नहीं, जनता के हक की है, और जब तक मेरे लोगों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, मैं चुप नहीं बैठूंगा।”



