नशे का डोज, ड्रग्स का जाल, निशाने पर युवा… तस्करी बेलगाम, पुलिस V/S ड्रग माफिया

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गांव-देहात से लेकर बड़े शहरों तक—ड्रग्स का नेटवर्क फैल चुका है। आंकड़े डराने वाले है पिछले तीन सालों में नशा तस्करी के मामलों में ज़बरदस्त उछाल आया है। गांजा, स्मैक, कोकीन, अफीम, डोडा पोस्त, हेरोइन और ब्राउन शुगर। हर तरह का नशा अब युवाओं तक आसानी से पहुंच रहा है। यही नहीं सुनहरे भविष्य की उम्र में युवा नशे के दलदल में धकेले जा रहे हैं। बढ़ती ड्रग तस्करी अब राजस्थान पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है ।


राजस्थान में नशे का कारोबार किस हद तक फैल चुका है। इसका अंदाज़ा पुलिस रिकॉर्ड और बरामदगी के आंकड़े खुद बयां करते है। पिछले तीन वर्षों में NDPS एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 40 फ़ीसदी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है। नशे की तस्करी अब सिर्फ़ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। ग्रामीण इलाकों में सस्ता नशा खपाया जा रहा है। तो वहीं शहरों में महंगा और हाई-प्रोफाइल नशा पहुंचाया जा रहा है। यह एक सुनियोजित नेटवर्क है। जो पूरे राजस्थान को अपनी चपेट में ले चुका है

कहां से आता है नशा?
हेरोइन – पाकिस्तान, पंजाब बॉर्डर, श्रीगंगानगर, नशीली दवाएं – उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, स्मैक / अफीम – प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, चरस – नेपाल, MD ड्रग – गुजरात पोर्ट, हरियाणा, पंजाब, गांजा – ओडिशा, तेलंगाना, झारखंड, म्यांमार से आता है । इसके साथ ही नशा सिर्फ़ अपराध नहीं बढ़ा रहा। बल्कि समाज की जड़ें भी खोखली कर रहा है। परिवार टूट रहे हैं, घरेलू हिंसा बढ़ रही है । स्कूल, कॉलेज और हॉस्टल तक नशा पहुंच चुका है। कई परिवार अपने बच्चों को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए लाखों रुपये इलाज में खर्च कर चुके हैं। जो यह बताता है कि नशा अब सिर्फ़ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं…बल्कि सामाजिक और आर्थिक तबाही भी कर रहा है ।
एक तरफ़ MD ड्रग्स और हेरोइन जैसे महंगे नशे हैं। जिनकी थोड़ी-सी मात्रा भी लाखों-करोड़ों की कीमत रखती है और यह शहरों में खपाए जाते हैं । दूसरी तरफ़ डोडा चूरा और गांजा जैसे सस्ते नशे हैं। जो ग्रामीण इलाकों में बड़ी मात्रा में खपते हैं। इसके पैटर्न और एक्शन पर गौर करें तो महंगे नशे का नेटवर्क- अंतरराष्ट्रीय और इंटर-स्टेट, सस्ता नशे का नेटवर्क है-गांव-देहात में फैल रहा, पुलिस ने कार्रवाई करके तोड़े नेटवर्क फिर भी तस्करों का नेटवर्क और जड़ें हैं मज़बूत

इसके साथ ही कहा जा रहा है कि NDPS एक्ट की लचर कानूनी प्रक्रिया नशा तस्करों के हौसले बढ़ा रही है । इसमें कम मात्रा रखो—आसानी से ज़मानत मिलेगी । कई मामलों में थाने से ही रिहाई हो रही है । तो वहीं नाबालिगों से खूब कराओ तस्करी—क्योंकि उन्हें भी ज़मानत मिल ही जाती है । नतीजा ये हो रहा है एक ही तस्कर बार-बार गिरफ्तार होता है और बार-बार छूटता है और फिर उसी धंधे में लौट आता है । जब तक NDPS कानून में सख़्ती नहीं होगी। जब तक तस्करों को कड़ी सज़ा नहीं मिलेगी। तब तक नशे पर लगाम लगाना मुश्किल है क्योंकि नशा राजस्थान के लिए चेतावनी है । अगर वक्त रहते इसे नहीं रोका गया तो वो दिन दूर नहीं जब राजस्थान भी “उड़ता पंजाब” बन जाएगा


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